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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, रीवा-जबलपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के भोपाल ज़ोनल कार्यालय ने 19 जून को मध्य प्रदेश के रीवा और जबलपुर जिलों में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई सड़क निर्माण परियोजनाओं में उपयोग किए गए बिटुमेन के फर्जी बिलों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार, यह जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत शुरू की गई है। एजेंसी ने बताया कि इस मामले की नींव मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई कई FIR पर आधारित है।
ये FIR रीवा और जबलपुर में IPC की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई थीं। प्रारंभिक जांच में सड़क निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की खरीद और आपूर्ति में अनियमितताओं की बात सामने आई थी।
ईडी की टीमों ने दोनों जिलों में संबंधित ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच की और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। जांच एजेंसी का मानना है कि इस पूरे मामले में फर्जी बिलिंग के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की गई हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है और इसमें जुड़े अन्य व्यक्तियों व कंपनियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अभी तक ईडी ने किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है।
यह कार्रवाई उस व्यापक जांच का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें सरकारी निर्माण परियोजनाओं में होने वाले खर्च और आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।
ईडी की इस छापेमारी के बाद संबंधित जिलों में निर्माण और ठेका कार्यों से जुड़े हलकों में हलचल देखी गई है। अधिकारी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, रीवा और जबलपुर में की गई ईडी की यह कार्रवाई सड़क निर्माण परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।





